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गुलज़ार ~ शायद * Guljhar

कोई अटका हुआ है पल शायदवक़्त में पड़ गया है बल शायद आ रही है जो चाप क़दमों कीखिल रहे हैं कहीं कँवल शायद दिल अगर है तो दर्द भी होगाइसका कोई नहीं है हल शायद राख़ को भी कुरेद...

गुलज़ार ~ स्त्री

स्त्री, तुमपुरुष न हो पाओगी वो कठोर दिल कहाँ से लाओगी ?   ज्ञान की तलाश क्या सिर्फ बुद्ध को थी?क्या तुम नहीं पाना चाहती वो ज्ञान?किन्तु जा पाओगी,अपने पति परमेश्वर और नवजात शिशु को छोड़कर ?तुम तो उनपर जान...

गुलज़ार ~ स्त्री, तुम

स्त्री, तुम पुरुष न हो पाओगी ~ गुलज़ार स्त्री, तुम पुरुष न हो पाओगी…. ज्ञान की तलाश क्या सिर्फ बुद्ध को थी? क्या तुम नहीं पाना चाहती वो ज्ञान? किन्तु जा पाओगी, अपने पति परमेश्वरऔर नवजात शिशु को छोड़कर…. तुम तो उनपर जान...